एड्स क्या होता है –

आप किसी HIV पॉजिटिव व्यक्ति को तब तक एड्स ग्रस्त रोगी नहीं कह सकते हैं, जब तक HIV वायरस व्यक्ति के शरीर पर पूरी तरह से हमला न बोल दें। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 8 से 10 साल का समय लगता है। दरअसल एचआईवी के शरीर में दाखिल होने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर पर कई तरह की बीमारियां और इन्फेक्शन पैदा करने वाले वायरस अटैक करने लगते हैं। एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8 से 10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति को ही एड्स ( AIDS- Acquired Immunodeficiency Syndrome) कहा जाता है। वैसे, एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद से एड्स होने तक के गैप को दवाओं की मदद से बढ़ाया जा सकता है और कुछ बीमारियों को ठीक भी किया जा सकता है।

एचआईवी कैसे फैलता है?

  • एक संक्रमित व्यक्ति के साथ कंडोम पहने बिना गुदा या योनि संभोग में संलग्न होना।
  • सिरिंज और सुइयों को किसी ऐसे व्यक्ति के साथ साझा करना जिसे पहले से ही एचआईवी एड्स है।
  • एक शल्य चिकित्सा उपकरण या एक सुई लगना, जो एचआईवी संक्रमित रक्त से दूषित है।
  • संक्रमित योनि स्राव, वीर्य, एचआईवी संक्रमित रक्त में घावों और खुले घावों के संपर्क में आ रहा है।
  • शिशु अपनी मां से एचआईवी एड्स विकसित कर सकते हैं जो स्तनपान या जन्म के दौरान पहले ही संक्रमित हो चुके हैं।
  • एचआईवी एड्स को गले लगाने, पहनने के चश्मे या चुंबन साझा करके प्रसारित नहीं किया जा सकता है।

लक्षण

  • गले, ग्रोइन और बगल में सूजन ग्रंथियां
  • तीव्र मांसपेशियों में दर्द
  • हल्का बुखार
  • सिर दर्द लक्षण

एड्स से बचाव

  • जीवन-साथी के अलावा किसी अन्‍य से यौन संबंध नही रखे।
  • यौन सम्‍पर्क के समय निरोध(कण्‍डोम) का प्रयोग करें।
  • मादक औषधियों के आदी व्‍यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सिरिंज व सूई का प्रयोग न करें।
  • एड्स पीडित महिलाएं गर्भधारण न करें, क्‍योंकि उनसे पैदा होने वाले‍ शिशु को यह रोग लग सकता है।
  • रक्‍त की आवश्‍यकता होने पर अनजान व्‍यक्ति का रक्‍त न लें, और सुरक्षित रक्‍त के लिए एच.आई.वी. जांच किया रक्‍त ही ग्रहण करें।
  • डिस्‍पोजेबल सिरिन्‍ज एवं सूई तथा अन्‍य चिकित्‍सीय उपकरणों का 20 मिनट पानी में उबालकर जीवाणुरहित करके ही उपयोग में लेवें, तथा दूसरे व्‍यक्ति का प्रयोग में लिया हुआ ब्‍लेड/पत्‍ती काम में ना लेंवें।
  • एड्स-लाइलाज है- बचाव ही उपचार है

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