पित्ताशय

पित्ताशय की थैली (गॉलब्लेडर) मानव अंग के रूप में पित्तरस (bile) के भण्डारण का कार्य करती है तथा भोजन को पचाने के लिए पित्त को छोटी अंत में प्रभावित करती है। वर्तमान में पित्ताशय (गॉलब्लेडर) से सम्बंधित समस्याओं के मामलों में वृद्धि हुई है। इसके अंतर्गत गैल्स्टोन, अग्नाशयशोथ (pancreatitis) और कोहलेनजिटिस (cholangitis) आदि पित्ताशय की थैली (गॉलब्लेडर) से सम्बंधित रोग हैं। अपितु पित्ताशय की थैली मानव को जीवित रहने के लिए जरूरी नहीं है, क्योंकि पित्त अन्य तरीकों से भी छोटी आंत तक पहुँच सकता है। अर्थात पित्ताशय की थैली के बिना भी व्यक्ति जीवित रह सकता है

पित्ताशय के कार्य –

  • मानव शरीर में यकृत द्वारा उत्पादित पित्तरस को प्राप्त करता है,
  • पित्त को स्टोर करके रखना,
  • डुओडेनम (Duodenum) या छोटी आंत में सामान्य पित्त नली के माध्यम से पित्तरस को जारी करना
  • वसा के पाचन में योगदान देना,

पित्ताशय सम्बन्धी रोग –

पित्ताशय रोग, पित्ताशय की थैली को प्रभावित करने वाली स्थितियों से सम्बंधित होते हैं। पित्ताशय की थैली में सूजन (Inflammation) पित्ताशय रोग का प्रमुख कारण बनती है, जिसे कोलीसिस्टाइटिस (cholecystitis) के रूप में जाना जाता है। यह सूजन प्रायः छोटी आंतों की ओर खुलने वाले पित्ताशय नलिकाओं को अवरुद्ध उत्पन्न कर सकती है, और अंततः यह नेक्रोसिस (Necrosis) (ऊतक विनाश) या गैंग्रीन (Gangrene) का कारण बन सकती है। पित्ताशय रोग (Gallbladder disease) के कई प्रकार हैं:

पित्ताशय की थैली का रोग गैल्स्टोन (Gallstones)

जब किसी कारणवश पित्त में उपस्थित पदार्थ (जैसे कोलेस्ट्रॉल, पित्त लवण, और कैल्शियम या बिलीरुबिन) कठोर कणों का निर्माण कर पित्ताशय की थैली और पित्त नलिकाओं को अवरुद्ध कर देते हैं, तो इस स्थिति को गैल्स्टोन के रूप में जाना जाता है। गैल्स्टोन (Gallstones) आमतौर पर हानिरहित होते हैं, परन्तु कभी-कभी दर्द, मतली या सूजन का कारण भी बन सकते हैं।

पित्ताशय रोग का इलाज

पित्ताशय रोग का इलाज (gallbladder treatment) करने के लिए निम्न प्रकार की प्रक्रियाओं को अपनाया जा सकता है:जीवन शैली में परिवर्तन (Lifestyle changes) – जीवन शैली में परिवर्तन गॉलब्लेडर रोग (gallbladder disease) के लक्षणों को कम करने में मददगार हैं। अतः एक स्वस्थ्य जीवनशैली को अपनाकर गॉलब्लेडर से सम्बंधित समस्याओं तथा अन्य समस्याओं से बचा जा सकता है। अधिक वजन और मधुमेह जैसी समस्याएं गैल्स्टोन की संभावना में वृद्धि कर सकती हैं। अतः वजन कम करने और मधुमेह पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए स्वस्थ्य जीवन शैली को अपनाया जाना चाहिए। इसके तहत धूम्रपान छोड़ने और अल्कोहल सेवन को सीमित करने, व्यायाम करने आदि की सिफारिश की जाती है।

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