ह्रदय (The Heart)

ह्रदय रक्त परिसंचरण तंत्र का प्रमुख एवम विशिष्ट अंग हैं। यह एक पेशीय, खोखला, संकुचनशील, शंक्वाकार अंग है जो वक्ष में स्टर्नम के पीछे दोनों फेफड़ों के मध्य ऊतकों के एक भाग जिसे मीडिएस्टिनम कहते हैं, तथा कुछ बायी और को हटा हुआ होने के कारण इसका एक तिहाई भाग शरीर की मध्य रेखा से दायी और को तथा दो तिहाई भाग बायी ओर को स्थित रहता हैं। ह्रदय का ऊपरी भाग कुछ चौड़ा होता हैं जो आधार कहलाता हैं तथा कुछ दायी और झुका रहता हैं। निचला नुकीला भाग शिखर कहलाता हैं जो कुछ बायी और को तथा थोड़ा आगे को झुका और डायाफ्राम पर स्थित रहता हैं। शिखर की सीमा पाँचवी एवम छठी बायी पसलियों के मध्य तक पहुँच जाती हैं। इसी स्थान पर हाथ रखने से ह्रदय स्पंदन का आभास मिलता हैं।

इसका आकार स्वयं (व्यक्ति विशेष) की मुट्ठी के आकार का होता हैं। औसतन इसकी लंबाई लगभग 12 सेमी. तथा चौड़ाई 9 सेमी. (5*3.5 इंच) होती हैं। इसका वजन वयस्क पुरुषों में लगभग 250 से 390 ग्राम तथा वयस्क स्त्रियों में 200 से 275 ग्राम के बीच होता हैं।

ह्रदय की संरचना (Structure of the Heart) :-

ह्रदय भित्ति का निर्माण निम्न तीन परतों से होता हैं –

  1. पेरिकार्डियम (Pericardium)
  2. मायोकार्डियम (Myocardium)
  3. एंडोकार्डियम (Endocardium)

पेरिकार्डियम

पेरिकार्डियम या हृदयावरण दो कोशों का बना होता हैं। बाह्य कोष तन्तुमय ऊतकों का बना होता हैं तथा अन्दर से सीरमी कला को दोहरी परत की निरंतरता में होती हैं। बाह्य तन्तुमय कोष ऊपर ह्रदय की बड़ी रक्तवाहिकाओं के टुनिका एडवेन्टिशिया के साथ निरंतरता में रहता हैं तथा नीचे डायाफ्राम से सटा रहता हैं। तन्तुमय एवं अप्रत्यास्थ प्रकृति होने के कारण यह ह्रदय के अत्यधिक फैलाव को रोकता हैं।

सीरमी कला की बाह्य परत, पार्शिवक पेरिकार्डियम तन्तुमय कोष को आस्तरित करती हैं। आन्तरिक परत, अन्तरांगी पेरिकार्डियम अथवा एपिकार्डियम पार्शिवक पेरिकार्डियम के निरंतरता में होती हैं, ह्रदय पेशी से चिपटी होती हैं।

सीरम कला में चपटी उपकला कोशिकाओं का समावेश रहता हैं। ये अन्तरांगी एवं पार्शिवक परतों के बीच के स्थान में एक सीरमी द्रव को स्रावित करती हैं जो ह्रदय स्पंदन के दौरान दोनों परतों के बीच घर्षण को रोकता हैं जिससे ह्रदय स्वच्छान्दतापूर्वक गतिशील बना रहता हैं।

मायोकार्डियम

मायोकार्डियम विशेष प्रकार की हृदयपेशी की बनी होती हैं जो केवल ह्रदय में पायी जाती हैं। इसमें विशेष प्रकार के तंतु रहते हैं जो अनैच्छिक वर्ग के होते हैं। मायोकार्डियम की मोटाई भिन्न भिन्न होती हैं, यह शिखर पर सबसे मोटी होती हैं और आधार की ओर पतली होती चली जाती हैं क्योंकि इसे अधिक कार्य करना पड़ता हैं, दाहिने निलय में पतली रहती हैं, क्योंकि इसे सिर्फ फेफड़ों तक रक्त प्रवाहित करना होता हैं तथा अलिंदों में बहुत पतली रहती हैं।

एंडोकार्डियम

एंडोकार्डियम ह्रदय में सबसे भीतर की एक पतली, चिकनी, झिलमिलाती कोमल कला हैं। यह चिपटी उपकला कोशिकाओं से निर्मित हैं जो एंडोथीलियम के साथ निरंतर रहकर रक्त वाहिकाओं के आंतरिक स्तर में विलीन हो जाती हैं। एंडोकार्डियम ह्रदय के चारों कक्षों एवम कपाटों को आच्छादित किए रहती हैं।

ह्रदय के कार्य (Function of the heart)

ह्रदय एक पम्प हैं जिसका कार्य रक्त को अंदर खींचना और धमनियों के द्वारा शरीर के अन्य भागों में पहुँचाना हैं। ह्रदय शरीर के सभी भागों से उर्ध्व महाशिरा एवम निम्न महाशिरा माध्यम से अशुद्ध रक्त को अपने दाएं एट्रियम में संगृहीत करता हैं। जब दायां एट्रियम पूरी तरह भर जाता हैं तो वह संकुचित होता हैं और रक्त दाएं एट्रियोवेंट्रिकुलर या ट्राइकस्पिड वाल्व से होकर दाएं वेंट्रिकल में उतर जाता हैं तथा वाल्व बंद हो जाता हैं। अगले क्षण जब दायां वेंट्रिकल संकुचित होता हैं तो रक्त फुफ्फुसीय (पल्मोनरी) वाल्व से होकर फुफ्फुसीय धमनी के मुख्य भाग में पहुँच जाता हैं, जो आगे चलकर दो शाखाओं में विभाजित होकर दाहिनी एवम बायी फुफ्फुसीय धमनियों में बट जाती हैं। ये धमनियाँ फुफ्फुसों तक अशुद्ध रक्त को शुद्ध होने के लिए ले जाती हैं। फुफ्फुसों से शुद्ध रक्त चार फुफ्फुसीय शिराओं के द्वारा ह्रदय के बाएं एट्रियम में आ जाता हैं। बायां एट्रियम जैसे ही संकुचित होता हैं, रक्त धक्के बाएँ एंट्रियोंवेंट्रिकुलर या बाइकस्पिड वाल्व से होके बाएं वेंट्रिकुलर में पहुँच जाता हैं।

ह्रदय की रक्त आपूर्ति (Blood supply of the heart)

ह्रदय से शरीर के विभिन्न भागों को रक्त पहुँचाने वाली रक्त वाहिनियाँ, धमनियाँ तथा शरीर के विभिन्न भागों से रक्त को ह्रदय में पहुँचाने वाली रक्त वाहिनियाँ, शिराएं कहलाती हैं। ह्रदय पेशी या मायोकार्डियम में रक्त की आपूर्ति दायीं एवम बायीं कॉरोनरी धमनियों द्वारा होती हैं। ये आरोही महाधमनी के उद्गम स्थल पर स्थित एऑर्टिक वाल्व के दो विपरीत कस्पस से निकलती हैं। कॉरोनरी धमनियां या इसकी शाखाएं ह्रदय में फैली रहती हैं। बायीं कॉरोनरी धमनी का मुख्य भाग केवल लगभग एक इंच लंबा होता हैं तथा कुछ ही दूरी पर सरकमफ्लेक्स एवम एंटीरियर इंटरवेंट्रीकुलर शाखाओं में विभाजित हो जाता हैं। सरकमफ्लेक्स शाखा एंट्रियोंवेन्ट्रिकुलर ग्रूव के बायी ओर फैलती हैं। ह्रदय की पोस्टीरियर सतह पर यह दायीं कॉरोनरी धमनी की एंटीरियर इंटरवेंट्रीकुलर शाखा ह्रदय की एंटीरियर सतह पर स्थित इंटरवेंट्रीकुलर सल्कस में पहुंचकर दोनों वेंट्रिकल्स को रक्त आपूर्ति करती हैं। दायीं कॉरोनरी धमनी की पोस्टीरियर इंटरवेंट्रीकुलर शाखा भी इसी प्रकार की निचली सतह पर इंटरवेंट्रीकुलर ग्रूव में पहुँचती हैं। दोनों इंटरवेंट्रीकुलर शाखाएं ह्रदय के निचले किनारे के चारों ओर एक- दूसरें से जुड़ जाती हैं। कॉरोनरी धमनियों की अतिरिक्त शाखाएं जो ह्रदय के बाएं किनारे के साथ फैली होती हैं, बाएं वेंट्रिकल की रक्त आपूर्ति करती हैं, तथा दाहिनी कॉरोनरी धमनी की मार्जिनल शाखा जो ह्रदय के निचले किनारें के साथ फैली होती हैं, दाएं वेंट्रिकल को रक्त आपूर्ति करती हैं।

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