अवसाद व्यक्ति के मूड की वह स्थिती है ,जिसमे उसे भोजन ,लैंगिक कार्य ,मित्रो , मनोरंजन ,दैनिक कार्य अथवा शोक किसी में भी दिलचस्पी नही रहती है l उसे किसी से कोई आशा नही होती l प्रत्तेक हानि के लिये वह अपने आपको ही दोषी ठहराता है l नींद अव्यवस्थित हो जाती है l किसी भी कार्य में मन नही लगता है l व्यक्ति आत्महत्या के बारे में सोचता रहता है उसका वजन बहुत अधिक परिवर्तित हो जाता है यदि यह लक्षण किसी भी व्यक्ति में दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहते है तो उस व्यक्ति को अवसाद ग्रसित कहा जाता है l

उपचार न मिलने पर रोग की जटिलताएं गंभीरतम होती है और यहाँ तक की अवसाद के कारण रोगी आत्महत्या कर लेते है lदुःख और उदासीनता की स्थित को अवसाद कहते है ,यह स्त्री और पुरुष दोनों को बराबर प्रभावित करता है l

अवसाद के कारण –

तनाव अवसाद का सबसे बड़ा कारण है l तनावपूर्ण स्थितियों में अथवा तनाव पूर्ण वातावरण में रहकर रोगी बहुत ही शीघ्र ही तनाव का शिकार हो जाता है l

आनुवंशिक कारक –

यदि पति-पत्नी दोनों अवसाद से ग्रसित है उनकी होने वाली संतानों में अवसाद से ग्रसित होने की सम्भावना 70 -80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है l

जैविक कारक –

अवसाद के रोगियों में अन्तःस्रावी ग्रंथियों का कार्य विकार ग्रस्त हो जाता हा l इन रोगियों में कार्टीसोल का अत्यधिक मात्रा में स्राव होता है ,जिसे डेक्सामेथासोंन द्वारा दबाया नही जाता l

डिप्रेशन के आम लक्षण

  • आनन्द वाली किसी भी चीज़ में आनन्द ना उठा पाना।
  • हमेशा थकान जैसा महसूस करना।
  • ऊर्जा का स्‍तर कम हो जाना।
  • किसी भी काम का निर्णय ना ले पाना।
  • किसी भी काम में मन न लगना।
  • ज़िन्दगी के लिए एक उलझा हुआ नज़रिया होना।
  • बिना कारण वज़न का बढ़ना या कम होना।
  • खान पान की आदतों में बदलाव करना।
  • आत्महत्या के उपाय करना और आत्महत्या के बारे में सोचना।
  • मन की एकाग्रता खोना, मन का एकाग्र न हो पाना।
  • जरा सी बात पर मन खिन्‍न हो जाना।
  • हमेशा रोने का मन करना।
  • चिड़चिड़ा हो जाना।
  • नींद न आना यानी अनिद्रा का शिकार हो जाना।

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