निमोनिया क्या है

जब विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस फेफड़ों को संक्रमित करके श्वसन प्रणाली को प्रभावित करते हैं, तो इसे निमोनिया कहा जाता है। यह एक या दोनों फेफड़ों पर असर डाल सकता है और किसी भी व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। फेफड़ों का वायु–कोष संक्रमण से सूज जाता है और मवाद व अन्य तरल पदार्थों से भर जाता है जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसका एक सामान्य लक्षण खांसी है, जिसके बाद फेफड़ों से गाढ़ा बलगम (कफ) निकलता है जो हरे, भूरे रंग का या खून से रंगा हो सकता है। लोग सर्दी या फ्लू के बाद और अक्सर सर्दियों के महीनों में निमोनिया से ग्रसित होते हैं।

निमोनिया बिना किसी चेतावनी के एक, दो या कई दिनों के लिए किसी को भी हो सकता है।इसे गलती से सिर्फ तेज जुकाम भी समझा जा सकता है और खांसी इसका सबसे पहला और आम लक्षण होता है।निमोनिया का इलाज घर पर किया जा सकता है और इसे ठीक होने में लगभग 2 से 3 सप्ताह का समय लगता है। यह समस्या शिशुओं, बुजुर्गों और अन्य बीमारियों से जूझते लोगों में गंभीर व खतरनाक साबित हो सकती है। इस समस्या से ग्रसित लोग बहुत बीमार हो सकते हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना जरूरी हो सकता है।

निमोनिया होने के क्या कारण हैं

बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी जैसे विभिन्न प्रकार के रोगजनकों (रोगाणुओं) के कारण निमोनिया हो सकता है। ज्यादातर स्थितियां वायरल और बैक्टीरियल होती हैं। अक्सर यह ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण से शुरू होता है, जो नाक और गले पर असर करता है। लक्षण 2 या 3 दिनों के बाद दिखाई देना शुरू हो जाते हैं और संक्रमण धीरे–धीरे फेफड़ों तक पहुँच जाता है। इससे फेफड़ों में सफेद रक्त कोशिकाएं, बलगम और द्रव भरने लगता है, जो फेफड़ों के वायु–कोष में इकट्ठा होता है। इस प्रकार होने वाला जमाव हवा के सुगम मार्ग में बाधा डालता है जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है।इस लक्षण से यह संकेत मिलता है कि किस जीव के कारण निमोनिया हो रहा है। बैक्टीरिया के कारण होने वाले निमोनिया में बच्चे अचानक तेज बुखार और तीव्र श्वसन के साथ काफी जल्दी बीमार पड़ते हैं। वायरस के कारण होने वाला निमोनिया अपने लक्षण धीरे–धीरे दिखाता है और कम गंभीर होता है।

शिशुओं में निमोनिया के लक्षण

  • कंपकंपी और पसीने के साथ बुखार।
  • गंभीर खांसी के साथ गाढ़ा बलगम जो कि हरा, पीला या खून मिला हुआ होता है।
  • बच्चा आमतौर पर अस्वस्थ होता है और उसे भूख नहीं लगती।
  • तेज – गहरी सांस लेना: पसलियों के बीच की त्वचा, रिब केज के नीचे और हँसुली की हड्डी के ऊपर की त्वचा, प्रत्येक सांस के साथ आकुंचित होती है।
  • पिछले 24 घंटों में बच्चे ने तरल पदार्थ का सेवन सामान्य मात्रा के आधे से भी कम किया है।
  • घरघराहट की आवाज (प्रत्येक सांस के साथ एक सीटी जैसी ध्वनि)।
  • होंठ और नाखून नीले पड़ना।

निमोनिया के लिए चिकित्सकीय उपचार

यदि निमोनिया बैक्टीरिया के कारण होता है, तो बच्चे को एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं और ये दवाएं टैबलेट या तरल रूप में हो सकती हैं। पहले 48 घंटों के भीतर ही आपको बच्चे में महत्वपूर्ण सुधार दिखाई देने लगेंगे, लेकिन कुछ दिनों तक खांसी बनी रहेगी। यह जरूरी है कि एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स लिया जाए, भले ही बच्चा बेहतर महसूस करने लगा हो।यदि बच्चा सांस लेने मे कठिनाई महसूस कर रहा है और 48 घंटों के बाद भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं होता है और बुखार के गंभीर होने के संकेत मिलते हैं, तो अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होगी साथ ही, 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं को भर्ती किए जाने की संभावना अधिक होती है। अस्पताल के डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि बच्चे को बूंद–बूंद करके पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ और एंटीबायोटिक मिलें। यदि सांस लेने में परेशानी होती है, तो एक मास्क के माध्यम से बच्चे को अतिरिक्त ऑक्सीजन दी जाती है। निमोनिया की गंभीरता यह निर्धारित करती है कि बच्चा कितने समय तक अस्पताल में रहता है। कई मामलों में, अस्पताल में एक या दो दिन रहने की जरूरत पड़ सकती है जबकि गंभीर मामलों में अस्पताल में पाँच या छह दिन रहने की जरूरत होती है। यदि अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाने के बाद बच्चा अच्छी तरह से ठीक हो जाता है, तो अनुवर्ती (फॉलो अप) उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। यदि लक्षण बने रहते हैं, तो आगे के मूल्यांकन के लिए छाती का एक्स–रे किया जाता है।

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