yog

योगा

योग भारत वर्ष में अत्यंत काल से योगाभ्यास करने की पद्धति प्रचलित है l आज से हजारो वर्ष पूर्व हमारे ऋषि-मुनियों ने जन -कल्याण के उद्देश्य से योगशास्त्र की रचना की थी l योग का स्वरुप अत्यंत व्यापक है,इसी लिये इसे किसी एक की परिभाषा में बांधा नही जा सकता l

योगासनों के अनगिनत स्वास्थ्य लाभ है

  • व्यक्ति की नकारात्मक सोच धीरे – धीरे खत्म होने लगती है एवं वह अपने लक्ष्य की और तीव्रता से बढ़ता है |
  • गलत आहार – विहारों का ज्ञान होता है एवं आत्मिक शक्ति प्रबल होती है | जिससे व्यक्ति नशे या गलत व्यसनों को आसानी से अपनी मर्जी से छोड़ देता है |
  • सभी प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक रोगों या विकारों का शमन होता है |
  • नियमित योगी शांत स्वाभाव एवं निर्मल मन का होता है |
  • सर्वांगीन स्वास्थ्य की प्राप्ति होती , शरीर हष्ट-पुष्ट बनता है , मन शांत रहता है एवं सभी और से व्यक्ति को सफलता मिलती है |
  • पवनमुक्तासन समूह एवं शक्ति बंध की क्रियाओं को अपनाने से व्यक्ति का शरीर मजबूत बनता है | पुरे शरीर में फुर्ती आती है , संधियों के जोड़ खुल जाते है एवं सम्पूर्ण शरीर क्रियाशील बनता है जिससे पुरे शरीर के विकारों का हरण होता है |
  • खड़े होकर किये जाने वाले योगासनों से शरीर की मांसपेशियों में मजबूती आती है जिससे गठिया, कम्पवात, मांसपेशियों का दर्द एवं अकडन, चली जाती है | साथ ही इन योगासनों को अपनाने से घुटने एवं जॉइंट्स की सभी बीमारियों में लाभ मिलता है |
  • वज्रासन समूह के योगासनों को अपनाने से स्त्रियों के मासिक धर्म, उनके जननांगो के विकारों में लाभ मिलता है | साथ ही वज्रासन में बैठ कर किये जाने वाले असनो से व्यक्ति का श्रोणी प्रदेश, प्रजनन अंग एवं पाचन अंगो में सुचारू ढंग से रक्त संचार बढ़ता है , जिससे प्रजनन अंगो के रोग जैसे – हार्निया, धातु – दुर्बलता, शुक्राणुओं की कमी, बवासीर, अंडकोष का बढ़ना, एवं जननांगो की स्थिलता आदि रोगों का हरण होता है |

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